मंगलवार, 31 जुलाई 2018

10 parimitaa

🌻धम्म प्रभात🌻

👉श्रामणेर ( सामनेर )👈

धम्म में आस्था रखने वालीे व्यक्ति प्रव्रजित हो काषाय वस्त्र ( चीवर ) धारण करने से वह श्रामणेर/ श्रामणेरी कही जाती है।

श्रामणेर बौद्ध धम्म का अध्ययन करता है। उसे अपने गुरु की सेवा करते हुए दस शीलों का व्रत लेना होता है।

            दस शील
१. पाणातिपाता वेरमणी सिक्खापदं समादियामि- जीव हिंसा से मैं विरत रहूँगा, मैं उसका व्रत लेता हूँ ।

२. अदिन्नादाना वेरमणी सिक्खापदं समादियामि- चोरी करने से मैं विरत रहूँगा,  मैं उसका व्रत लेता हूँ ।

३. अब्रह्मचरिया वेरमणी सिक्खापदं समादियामि- ब्रह्मचर्यव्रत को भंग न होने देने का मैं व्रत लेता हूँ ।

४. मुसावादा वेरमणी सिक्खापदं समादियामि- झूठ बोलने से मैं विरत रहूँगा,  मैं उसका व्रत लेता हूँ ।

५. सुरामेरय मज्जपमादट्ठाना वेरमणी सिक्खापदं समादियामि- नशा के सेंवन से मैं विरत रहूँगा, मैं उसका व्रत लेता हूँ ।

६. विकाल भोजना वेरमणी सिक्खापदं समादियामि- दोपहर के बाद भोजन करने से मैं विरत रहूँगा, मैं उसका व्रत लेता हूँ ।

७.नच्च गीत वादित विसुक दस्सना वेरमणी सिक्खापदं समादियामि- नाचने,गाने, बजाने और अश्लील हावभाव के देखने से मैं विरत रहूँगा, मैं उसका व्रत लेता हूँ ।

८.माला गन्ध विलेपन धारण मण्डन विभूसण ठ्ठाना वेरमणी सिक्खापदं समादियामि- माला,गन्ध तथा उबटन के प्रयोग से अपनें शरीर को सुन्दर बनाने की चेष्टा से मैं विरत रहूँगा, मैं उसका व्रत लेता हूँ ।

९. उच्चासयना महासयना वेरमणी सिक्खापदं समादियामि- ऊंचे और ठाट-बाट की शय्या पर सोने से मैं विरत रहूँगा, मैं उसका व्रत लेता हूँ ।

१०. जात रूप  रजत पठ्ठिग्गहणा वेरमणी सिक्खापदं समादियामि- सोने चांदी के ग्रहण करने से मैं विरत रहूँगा, मैं उसका व्रत लेता हूँ ।

इन दस शीलों का पालन करते हुए सामनेर अपने गुरु की निश्रा में धम्म का अध्ययन करता है। अपनी लगन और धम्म के प्रति प्रतिबद्धता और मैत्री भावना को बढ़ाते हुए सामनेर अपने गुरु का विश्वास संपादन करता है और संघ को विश्वास हो जाता है कि सामनेर शील में प्रतिष्ठित है और धम्म को जानने लगा है, तथागत के धम्म का प्रचार प्रसार करने योग्य हो गया है, तब उसे भिक्खु संघ के द्वारा उपसंपदा दी जाती है। बिना उपसंपदा प्राप्त किए सामनेर  भन्ते नहीं होता है।
इस पवित्र परंपरा को बरकरार रखने से धम्म में अशुद्धि नहीं होती है। लेकिन अफसोस की बात है कि आज व्यक्ति अपने आप बाजार से गेरुवा कपड़े खरीद कर पहन लेते हैं। धम्म का ज्ञान न होने से कुछ भी बोले जाते है। विनय जानते नहीं हैं, पर बौद्ध भिक्षु बनने की लालसा से, आदर सत्कार प्राप्त करने के लिए, दान आदि की लालच से खुद को भिक्षु बतलाते हैं और भोले उपासक व उपासिकाओं की भावना के साथ खिलवाड़ करते हैं। ऐसे छद्मवेशी भन्ते बौद्ध धम्म की हानि करते है।

बौद्ध धम्म कल्याणकारी है, अनुकरणीय है, इसलिए बौद्ध भिक्षुओं की आवश्यकता है। शीलवान, विनय में प्रतिष्ठित और धम्म प्रचार में प्रविण भिक्षुओं का आदर करना, उन से धम्म श्रवण करना, दान देना आदि उपासक व उपासिकाओं की जिम्मेदारी है।

नमो बुद्धाय

For Parents

स्कूल जाने वाले सभी बच्चों के अभिभावकों से एक अपील

1. शाम 8:00 बजे तक टीवी बंद कर दें। टीवी पर आठ बजे के बाद आपके बच्चे से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं होता है।
2. अपने बच्चे की स्कूल डायरी देखने के लिए 30-45 मिनट निकालिए। उसके गृहकार्य पूरे कराइए।
3. रोज सभी विषयों में उनका प्रदर्शन देखिए। उन विषयों का खास ध्यान रखिए जिसमें वह कमजोर है / अच्छा नहीं कर रहा है।
4. उनकी बुनियादी शिक्षा भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
5. उन्हें सुबह जल्दी उठने की आदत डालिए 5:30 बजे तक। उन्हें मेडिटेशन ध्यान लगाने का प्रशिक्षण दीजिए।
6. अगर आप पार्टी / सामाजिक आयोजन में जाते हैं और बच्चों के साथ इसमें देर रात तक मजे करते हैं तो अगले दिन बच्चे को आराम करने दीजिए (स्कूल मत भेजिए) अगर आप चाहते हैं कि बच्चा अगले दिन स्कूल जाए तो रात 10:00 बजे तक घर लौट आइए।
7. अपने बच्चे में पौधे लगाने और उनका ख्याल रखने की आदत का विकास कीजिए।
8. सोने के समय अपने बच्चों को पंचतंत्र, अकबर-बीरबल, तेनाली राम आदि की कहानी सुनाइए।
9. हर साल गर्मी की छुट्टी में (अपने बजट के अनुसार) कहीं घूमने जाइए। इससे वे अलग लोगों के साथ और अलग जगहों पर रहना सीखते हैं।
10. अपने बच्चे की प्रतिभा का पता लगाइए और उसे इसे निखारने में सहायता कीजिए (वह किसी विषय, संगीत, खेल, अभिनय, चित्रांकन, नृत्य आदि में दिलचस्पी रख सकता है)। इससे उसका जीवन आनंददायक हो जाएगा।
11. उसे सीखाइए कि प्लास्टिक का उपयोग नहीं करना चाहिए (कम से कम गर्म चीजें प्लास्टिक में उपयोग न करें)।
12. हर इतवार कोशिश कीजिए कि खाने की कोई ऐसी चीज बनाएं जो उन्हें पसंद है। उन्हें इसमें अपनी मदद करने के लिए कहिए। (उन्हें अच्छा लगेगा)
13. प्रत्येक बच्चे जन्म से वैज्ञानिक होते हैं उनके पास ढेरों सवाल होते हैं मुमकिन है हम जवाब न दें पर जानकारी न होने के कारण हमें सवाल पर गुस्सा नहीं दिखाना चाहिए। (उत्तर पता करने की कोशिश कीजिए औऱ उन्हें बताइए)
14. उन्हें अनुशासन और जीने के बेहतर तरीकों के बारे में बताइए। ( सही गलत के बारे में समझाइए )
15. दाखिले के लिए किसी स्कूल के सर्वश्रेष्ठ होने संबंध में निर्णय (कॉरपोरेट स्कूल या पास प्रतिशत ज्यादा होने या परिचितों, पड़ोसियों की सिफारिश या सरकारी स्कूल या कम बजट वाला स्कूल होने के आधार पर मत कीजिए)। सबसे अच्छा स्कूल वह है जो आपके बजट के लिहाज से उपयुक्त हो। भविष्य में आपको बच्चे की शिक्षा पर ज्यादा खर्च करने की जरूरत है। इसलिए आपको आज कुछ पैसे बचाने की जरूरत है। इसके अलावा दूसरे खर्चे तो हैं ही। इसलिए योजना सोच समझकर बनाइए।
16. उनमे खुद पढ़ने और सीखने की आदत डालिए। 
17.  उन्हें मोबाइल फोन का उपयोग न करने दिया जाए, आवश्यक होने पर अपनी देखरेख में ही मोबाइल का उपयोग करने दिया जाए।
18. बच्चे को अपने काम में सहायता करने के लिए कहिए। (इसमें खाना बनाना, सफाई, चीजों को व्यवस्थित करना शामिल है।)
19. और सबसे महत्त्वपूर्ण कि हमें अपने बच्चों को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार भी देने चाहिए ताकि वो जीवन में सफल और सही इन्सान बन सके। हमें अपने अनुभव के आधार पर अपने बच्चों का जीवन सुंदर और स्वस्थ बनाने में उनकी सहायता करना चाहिए।

Caste

नमस्कारचे सुद्धा आता
तुकडे पडलेत...
'जय जिजाऊ', 'जय भीम','जय भगवान', 'जय मल्हार','जय रोहिदास', 'जय राणा'...

सकाळ सुद्धा आता
*'जात'* घेऊनच उगवते...
'शिवसकाळ', 'भिमसकाळ',
'लहूसकाळ'...

समाज परिवर्तनाचा ध्यास घेऊन, हातात लेखणीची मशाल घेऊन, क्रांतीची भाषा करणारे कवी सुद्धा आता *'जात'* सांगून टाकतात...
'शिवकवी', 'भीमकवी', 'मल्हारकवी'...

वादळं सुद्धा आता
*'जात'* घेऊन येतात
'भगवं वादळं', 'निळं वादळं','हिरवं वादळं', 'पिवळं वादळं'...

रंगात विभागलेत आता
पाऊस, वारा, वादळं,
शहरातली दुकाने
अन्...
गावच्या वेशीसुद्धा...!

पण ...
रक्ताचा 'रंग' मात्र
अजूनही *'लालच'*..............!
😔😔😔
*''मनुष्य हीच खरी आहे जात''*  *भारतीय  हीच आपली जात*

God

😡 राग आला तर आला😡
         खालील प्रश्नाची
             उत्तरे द्यावी

1) भारतात 33 करोड देव आणि लाखो बुवा बापु आहे मग भारत गरीब का आहे?

2) गणपती आणि सरस्वती विद्येची देवता आहे मग भारतात निरक्षरता का आहे?

3) भारतात ज्योतिष भविष्य सांगतात मग भुकंप, पुर, दहशतवादी हल्ले होतात मग ह्या ज्योतिषांना हे का नाही समजत?

*4) उपवास करुन मनोकामना पुर्ण होतात मग भारतात करोडो लोक उपाशी आहेत ज्यांना दोन वेळेच जेवण मिळत नाही मग त्यांना देव का प्रसन्न होत नाही?*

5) नवस करुन जर मुल होत असतील तर नवरा करायची गरज काय असे संत तुकाराम का म्हणतात?

6) तिर्थक्षेत्री दगड धोंडा पाणी असे संत तुकाराम का म्हणतात?

7) देव दर्शन करुन आल्यावर वाटेत गाडीला अपघात होऊन भक्त मरतात देवाच्या मंदीरात चेंगराचेगरी होऊन लोक मरतात मग *देव त्यांना का वाचवित नाही?*

8) देव चोरीला जात नाही फक्त _*दानपेट्या चोरीला जातात असे का?*_

9) मराठा, ओबीसी, एससी, एसटी लोकांच्या अंगात देव येतो मग ब्राम्हणाच्या अंगात देव का नाही येत?

10) देव आजार बरा करतो मग डाँक्टराकडेआपण का जातो?

11) देव आहे मग चोरी, बलात्कार, खुण का होतात?

12) सर्व 33 कोटी देवांनी भारतातच का जन्म घेतला? इतर देशात का नाही?

13) देवांना पोलिस संरक्षण का असते? देव स्वताच रक्षण का करु शकत नाही?

14) नवस करुन नोकरी मिळत असते मग अभ्यास करायची मेहनत करायची गरजच काय?

15) तिर्थक्षेत्रात भ्रष्टाचार केला जातो मग देव त्यांना शिक्षा का देत नाही?

16) देव सर्व काही देतो मग काम करायची गरज काय?

17) देवाच्या मंदीरा बाहेर भिकारयांची रांग का? 

🤔🤔🤔

डार्विन च्या  सिंधातानुसार माकडा पासून  माणूस  झाला  हे  संपूर्ण  जग  मान्य करत आदि  मानव  नग्न राहायचा, आणि त्या  नंतर  किती  तरी शतका नंतर  कापडाचा  शोध  लागलाय  मग  माझा  सरळ  आणि  सोपा  प्रश्न ??
*देवाच्या अंगावर  कपडे कसे?*
कारण कापडाचा  शोध  आदिमानवा नंतर  लागलाय.

*मग देवाने  माणूस  निर्माण  केला  कि  माणसाने  देव ?*


तुम्ही म्हणता  रामायण आणि महाभारत  अति  प्राचीन  आहे.

मग धातू युग याचा  कार्यकाळ कधीचा आणि  मग  रामायण  महाभारतात, लोखंडी  भाले आले कुठून?

*चक्राचा शोध कधी लागला?*

तो तर  इसवीससना नंतर लागलाय मग रामायण आणि महाभारत अची प्राचीन  असेल  तर  रथाला  चाके कशी  काय????

रामायणात वानर पूल बांधतात आणि दगडावर राम अस लिहील तर पाण्यावर दगड तरंगतात हे तात्पुरत मान्य केल तरी  वानर लिहायला कुठल्या शाळेत गेली होती?

तसा उल्लेख असेल तर सांगा मग, हनुमान  पर्वत  उचलून  आणतो  तर सगळी वानर  सेना  उचलून  का  नेली  नाही  ????
वानरांना त्रास द्यायचं  कारण  काय ????

या जगात  अगदी फुला चा  जन्म  स्त्री केसर  आणि  पुकेसर एकत्र  आल्या शिवाय  होत  नसेल  तर,

*ब्रम्ह देवाच्या  बाहू मधून क्षत्रिय लोकांचा  जन्म  होतो  हे कस  शक्य  आहे ?*

*या जगात  मादी  जात  पिलाला  जन्म  देते  ब्रम्ह  देव  तर  पुरुष आहे.*

नारद  मुनी  ची  आई  सरस्वती, सरस्वती चा  बाप  ब्रम्हा..

*मग  नारद मुनी  ब्रम्ह  देवाचा  पुत्र  कसा??*
बापाची  मुलगी  बहिण असणार  ना  ????
मग  बहिण  आई  कशी???

ब्रम्ह देवाच्या  मुलीचा  मुलगा  ब्रम्ह  देवाचा  नातू  असायला  हवा  मग नारद  मुनीचा  बाप, ब्रम्ह देव कसा?

*इसवीसनाच्या पाचव्या शतकात आर्य भटाने [०]शून्याचा शोध  लावला.*

तर मग रावणाला  १०  तोंड होती  हि  कुणी  मोजली?

कारण  एकवर शून्य दिल्या  शिवाय  दहा  कसे  होतील  आणि  महाभारतात तर कौरव १०० आहेत येथे तर दोन  शून्य आहेत  आणि  अस  असेल  तर  *खर  कोण ? आर्य भट का रामायण  कि  महाभारत??????*

*आणखी  एक  प्रश्न आदिमानवापासून  आजचा  माणूस  तयार झाला   हे विज्ञानाणे मान्य केल आहे मग  आदिमानवाची  जात  कुठली  आणि  धर्म  कुठला ?????????*

या सर्व भाकडकथा, पुराण वाचून हसु येईल पण सत्य हेच की,
* देवाची निर्मिती मानवानेच केली..*
*मानवानेच जात, धर्म निर्माण केले..*

आरक्षण

काल मराठा समाजाने आरक्षणासाठी महाराष्ट्र बंद केला. महार मांगासकट साळी, माळी, तेली, तांबोळी, कुणबी, भंडारी सगळेच टेंशनमध्ये आले. पण बौध्द समाज मात्र एकदम स्थितप्रद्न्य. आणि नुसताच स्थितप्रद्न्य नव्हे तर रिझर्व्हेशनच्या मुद्द्यावर या समाजाने मराठा समाजाला मनापासून भरभरुन पाठिंबाही देऊन टाकला. नुकतीच एक बातमी वाचनात आली. बिडमधल्या एका छोटाश्या ग्रामपंचायतीच्या सदस्या शालन नितिन धुताडमल या बाईने मराठा समाजाला आरक्षण मिळावं म्हणून आपल्या सदस्यत्वाचा राजिनामा दिला. आणि महत्वाचं म्हणजे या बाई बौध्द आहेत. ही साधी घटना नाही मित्रांनो. संपूर्ण महाराष्ट्रातून मराठा आरक्षणाच्या प्रश्नावर राजिनामा देणारी ही पहिली महिला आहे. एवढं शहाणपण या बौध्द समुहाला आलं कुठून? मला वाटतं या बौध्द समाजाला हे शहाणपण बाबासाहेबांनी दिलं आहे. १४ आक्टोबर १९५६ ला बाबासाहेबांनी या समाजाला बुध्दांसोबत हे शहाणपणही दिलं. किंबहुना बुध्द म्हणजेच शहाणपण, असं जर मी म्हटलं तर ते वावगं ठरु नये. आमच्या वाट्याच्या सवलती मराठा समाजाला देऊन टाका, असं विधान यदाकदाचित भविष्यात जर या बौध्द समाजाकडून आलं तर मला अजिबात आश्चर्य वाटणार नाही. कारण आपली प्रगती ही रिझर्व्हेशनमुळे झाली नसून ती प्रगती बौध्द धम्मामुळे झाली आहे, हे या बौध्दांना चांगलं माहित आहे. १४ आक्टोबर १९५६ ला बाबासाहेबांना साक्ष ठेऊन जे बौध्द झाले ते शहाणे तर झालेच पण एक अपूर्व धाडस बाबासाहेबांनी यांच्या धमन्यांमध्ये पेरलं असावे. त्या काळात एका क्षणात घरातले तेहतीस कोटी देव घराच्या बाहेर फेकून देणं म्हणजे खाऊ नाही. त्यासाठी वाघाचं काळीज हवं. बाबासाहेबांच्या एका आदेशासरशी हे देव बाहेर फेकून ही माणसे बौध्द झाली. नाहितर रांग लावून गणपतीला दुध पाजणारे आणि द्वारकामाईच्या भिंतीत साईबाबा प्रकट झाल्याची अफवा पसरताच हजारो मेंढरं तिथे गर्दी करताना आपण शिर्डीत पाहिलच आहे.

        अशा धाडसी प्रबुध्द परंपरेची एकविसाव्या शतकातली तिसरी पिढी काय करते आहे? कुठे आहे? या प्रश्नाचं उत्तर शोधायला गेलं की एक भिषण वास्तव समोर येतं. स्वातंत्र्योत्तर काळातलं हे भिषण वास्तव असं आहे की, सध्याच्या रिझर्व्हेशनच्या बाबतीत बोलायचं झालच तर, अनुसुचित जातीच्या तेरा टक्क्यामध्ये बौध्दांसकट ५९ जाती आहेत.अनुसुचित जमातीच्या सात टक्क्यामध्ये ४७ जाती आहेत आणि भटक्या विमुक्तांच्या अकरा टक्क्यामध्ये ५६ जाती आहेत. या १६२ जातींना आरक्षण बाबासाहेबांमुळे मिळालय हे वेगळ सांगायची गरज नाही. या सगळ्या जाती येथेच्छपणे या सवलती उपभोगतात पण ह्यांना बाबासाहेबांशी व त्यांच्या रिपब्लिकन पक्षाशी काहीही देणे घेणे नाही. पण या १६२ जातींच्या आरक्षणासाठी व त्यांच्या न्याय हक्काच्या रक्षणासाठी निळा झेंडा खांद्यावर घेऊन रस्त्त्यावर उतरुन लढतो तो फक्त बौध्दच. आणि हे सगळे सवलतीपात्र दलित, भटके विमुक्त मस्तपैकी सवलती उपभोगून सेना, भाजप, काँग्रेस, राष्ट्रवादीचे झेंडे खांद्यावर घेऊन बौध्दांनाच टार्गेट करण्यात मश्गूल आहेत. ओबिसींबाबतही परिस्थिती तशीच. या ओबिसींना रिझर्व्हेशनही बाबासाहेबांनी संविधानात अंतर्भूत केलेल्या प्रावधाना मुळेच मिळाले आहे. हे प्रावधान नसते तर मंडल आयोगही गठित झाला नसता. हा मंडल आयोग अमलात यावा म्हणून सर्वप्रथम रस्त्यावर उतरला तो बौध्दच. आणि आज स्वत:ला ओबिसीचे मसिहा म्हणविणारे त्यावेळी दलितांमुळे अपवित्र झालेला हुतात्मा स्मारक शुध्द करण्यासाठी गोमुत्र शिंपडण्यात व्यस्त होते. म्हणजे दलितांसाठी, ओबिसींसाठी लढणारे बौध्द, अनिसमध्ये शाम मानव व दाभोळकरांच्या पाठीशी उभे राहणारे बौध्द, कम्युनिष्टांची डफडी वाजवणारे बौध्द, आरपिआय(ए) मध्ये बौध्द, पिपल्स रिपब्लिकनमध्ये बौध्द, भारिपमध्ये बौध्द, बसपामध्ये बौध्द, बिआरएसपीमध्ये बौध्द इतकच नव्हे तर वामन मेश्रामच्या भारत मुक्ती मोर्च्यामध्ये सुध्दा बौध्दच.

        मग बौध्दांच्या पाठी कोण? या प्रश्नाचे स्पष्ट उत्तर, 'कोणीच नाही.' असे आहे. बौध्दाचा नेता कोण? या प्रश्नाचे उत्तरही, 'कोणीच नाही.' असे आहे. तुम्ही म्हणाल की, बौध्दांचे नेते प्रकाश आंबेडकर आहेत. पण मला मात्र हे मान्य नाही. कारण प्रकाश आंबेडकर तर बहुजनांचे, वंचितांचे नेते आहेत. आणि 'बौध्द' बहुजनही नाहित व वंचितही नाहित. तिच गत आठवले व कवाडेंची. केवळ बौध्दांचे नेते म्हटले तर राष्ट्रिय नेता होता येत नाही. त्यामुळे एक बाब स्पष्ट आहे की, बौध्दांना नेताच नाही. आणि खरं सांगायचं तर बौध्दांना नेत्याची गरजच नाही. कारण बौध्द हा इतका इंटलेक्च्युअल, इतका प्रगल्भ आहे की एक बाबासाहेब सोडले तर त्याला इतर कुणाला नेता मानायची गरजच नाही. म्हणूनच मी सुरवातीला म्हटल्याप्रमाणे १९५६ साली बाबासाहेबांनी आम्हाला नुसताच बुध्द दिला नाही तर एक शहाणपणही दिलं. आणि शहाण्या माणसांना नेत्याची गरज नसते. याच शहाण्या माणसांना मी 'माझी माणसे समजतो. या माझ्या माणसांविषयी मी आज बोलणार आहे.

       यावर मला कोणी जातीयवादी वा संकुचित ठरविण्याची शक्यता आहे. पण मला मात्र तसे अजिबात वाटत नाही. जो, जो बौध्द आहे, मग तो चर्मकारातून आलेला आकाश सोनावणे असो, मातंगातून आलेले विठ्ठलदादा उमप असो किंवा ब्राह्मणातून आलेले भालेराव असो. या सगळ्यांना मी माझी माणसे समजतो. कारण बौध्द होणे म्हणजे केवळ धर्म बदलणे, दिक्षा घेणे किंवा नमो तस्स म्हणणे, असे मी समजत नाही. बौध्द होणे म्हणजे डोळस होणे, प्रगल्भ होणे, बुध्दिमान होणे आणि परिपूर्ण शहाणे होणे. बौध्द होणे म्हणजे साक्षात विद्रोही होणे. म्हणून तर बौध्द झालेला पुण्यातला आमचा आकाश उर्फ अप्पा सोनावणे आपल्या मुलीचे लग्न संविधानाला साक्ष ठेऊन करतो आणि आपल्या मुलाचे नाव 'इंडियन' ठेवतो. ही धमक फक्त बौध्दातच असू शकते.

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