शुक्रवार, 17 अगस्त 2018

संविधान को किसने जलाया?

                      
                     *भारतीय संविधान*
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आखिर हुआ क्या था ?
एससी एसटी एक्ट को बरकरार रखने के लिए संसद द्वारा जो सहमति बनी उसके तथा आरक्षण के विरोध में द्वेष रखने वाले यूथ इक्वैलिटी फाउंडेशन एवं आजाद सेना ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर संविधान जलाया! इस दौरान भारतरत्न भीमराव आंबेडकर मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए अभद्र गालियां दी गई। साथ ही मनुवाद जिंदाबाद के नारे लगाए गए। आम जनता को इस घटना के पीछे छिपी सोच को जानना अनिवार्य है।
*■ भारतीय संविधान का मतलब क्या है?*
संविधान, किसी भी देश का मौलिक कानून होता है, जो सरकार के विभिन्न अंगों की रूपरेखा और मुख्य कार्य का निर्धारण करता है। संविधान के उद्देशिका-प्रस्तावना से इसके महत्व को हम आसानी से समझ सकते है।
आइए देखते है कि संविधान की प्रस्तावना हमें क्या सीख देती है?
*“हम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्वसंपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता, प्राप्त कराने के लिए तथा उन सबमें, व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित कराने वाली, बंधुता बढ़ाने के लिए, दृढ़ संकल्प होकर अपनी संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर 1949 को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।”*
*■ संविधान क्या है?*
भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। इसमें कुल 395 अनुच्छेद, 8 अनुसूचियां और 22 भाग (हिस्से) थे। यह दुनिया का सबसे विस्तृत लिखित संविधान है। अब वर्तमान में, इस संविधान में 465 अनुच्छेद जो 25 भागों और 12 अनुसूचियों में लिखित है। समय-समय पर संविधान में कई संशोधन किए जा चुके हैं। संविधान की अनेक विशेषताएं हैं, जिनमें धर्मनिरपेक्ष राज्य और संसदीय सरकार को अहम माना जाता है।
*■ संविधान जलाने का अर्थ क्या है?*
भारत का संविधान जलाना उसकी अवमानना है। इसी संविधान के मुताबिक संबंधित दोषियों के खिलाफ 3 वर्ष की सजा और उसकी नागरिकता छीनने का प्रावधान है। ‘द प्रीवेंशन ऑफ इन्सल्ट टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971 (अमेंडमेंट 2005) के मुताबिक संविधान को जलाने पर 3 साल से अधिक की सजा हो सकती है। द सिटीजनशिप एक्ट, 1955 के सेक्शन 10(2)(ब) के तहत संविधान के प्रति घृणा एवं निरादर करने वाले व्यक्ति की नागरिकता केंद्र सरकार छीन सकती है!’ नैतिक तौर पर देखा जाएं तो संविधान को जलाने से बड़ा इस देश में कोई अपराध नहीं हो सकता।
*■ संविधान को किसने जलाया ?*
क्या संविधान को जलाने वालों में हिंदू एससी है? क्या हिंदू एसटी ने संविधान जलाया है? क्या हिंदू ओबीसी ने संविधान को आग लगाया है? क्या 85 प्रतिशत हिंदू समाज संविधान को जलाने के लिए आतूर हुआ जा रहा है?
इन सवालों का जवाब आपको नकारात्मक ही मिलेेंगे। मतलब साफ है कि संविधान को सवर्ण (तथाकथित) जलाने पर आमादा है। 15 प्रतिशत तथाकथित सवर्णों के मन में संविधान के प्रति नफरत भरा हुआ है। आरोपियों के नाम व उपनाम उनके नफरतों की गवाही देते है।
*■ संविधान क्यों जलाया ?*
संविधान जलाने का मुख्य कारण है एससी, एसटी व ओबीसी समाज अब सवर्ण (तथाकथित) की बराबरी करने लगा है। नाली साफ करने वाले का बेटा कलेक्टर बन गया, बूट पॉलिश करने वाले का बेटा प्रोफेसर बनकर ज्ञान बांट रहा है। मरे हुए मवेशी ढोने वाले का बेटा अफसर बन गया। रिक्शा चलाने वाले का बेटा प्लेन चला रहा है। तमाम 85 फीसदी बहुजन समाज तरक्की के मार्ग पर है। अब कोई सवर्णों (तथाकथित) की कोई जी-हुजुरी नहीं करता। बहुजन अपने शक्ति के बल पर अहम ओहदों पर जाकर निर्णायक भूमिका अदा करने लगे है। ऐसे में जलन व द्वेष में तिलमिला उठे सवर्णों (तथाकथित) को बेहद तकलीफ व घृणा के भाव ने मानसिक रूप से रोगी कर दिया है।
*■ संविधान से द्वेष क्यों ?*
संविधान से सवर्ण (तथाकथित) इसलिए द्वेष करते हैं, क्योंकि दबे-कुचले 85 प्रतिशत बहुजन समाज को समानता के अवसर मिल रहे है। संविधान ने आरक्षण दिया है। आरक्षण का मतलब केवल प्रतिनिधित्व है। बराबरी में आने के लिए एक मौका मात्र है। हालांकि यह भी उतना ही सच है कि 85 प्रतिशत जनता को 50 प्रतिशत भी प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। 15 प्रतिशत सवर्ण (तथाकथित) 50 फीसदी पदों पर कब्जा जमाए बैठे है। इसके बावजूद वे संपूर्ण पदों को निगल जाना चाहते है। वे चाहते है कि बहुजन पुन: गुलामी की अवस्था में पहुंच जाएं और उनकी बराबरी करने की हिमाकत न कर सकें। दूसरा मुख्य कारण है एससी-एसटी एक्ट। यह कानून सख्त होने के कारण पिछड़ों पर अन्याय-अत्याचार करने वाले सवर्णों (तथाकथित) के खिलाफ तत्काल कार्रवाई का मौका देती है। अत्याचारी चाहता है कि वह अत्याचार करें और देश का कानून उसका बाल भी बांका न कर पाएं। इसलिए सवर्णाें (तथाकथित) की बौखलाहट बढ़ गई है और संविधान जलाने जैसी जुर्रत करने लगे है।
*■ ऐसे हालात क्यों पैदा हुए ?*
संविधान से प्राप्त आरक्षण व संसद से प्राप्त एससी-एसटी एक्ट तो बरसों से जारी रहा है। लेकिन बीते कुछ वर्षों में 85 प्रतिशत बहुजनों के खिलाफ द्वेष क्यों बढ़ गया है?
इसका मुख्य कारण है भाजपा पर सवर्ण (तथाकथित) मानसिकता का वर्चस्व। भाजपा के सभी अहम ओहदों पर सवर्ण (तथाकथित) राज करते है। भाजपा का उदय संघ से हुआ है। संघ ही भाजपा को संचालित करती है। संघ मूलत: सवर्णों (तथाकथित) का एक मजबूत संगठन है। इस संगठन की विचारधारा मनुस्मृति से प्रेरित है। जब भाजपा बहुमत से सत्ता में आ गई तो उसने अपने नारे के अनुरूप काम करना बंद कर दिया। उसने सबका साथ तो ले लिया, लेकिन सबका विकास करने के बजाय सवर्णों (तथाकथित) को संरक्षण देना शुरू कर दिया। कानून व न्याय प्रक्रिया में जिस तरह से दुजाभाव दिख रहा है, वह भाजपा के हिंदुत्व की आड़ में सर्वणों द्वारा मनुव्यवस्था को दोबारा से लागू करने का प्रयास है।
*■ 'मनुवाद जिंदाबाद' का मतलब क्या है ?*
मनुवाद को यदि एक वाक्य में परिभाषित किया जाएं तो यह लिखना होगा कि समाज में मनु को जाति आधारित वर्ण व्यवस्था अर्थात ऊंच-नीच की सामाजिक रचना स्थापित करना है। अब  संविधान इसकी इजाजत देता तो संविधान को जलाना, नष्ट करना ही एकमात्र उपाय बच जाता है। मनुवाद चाहता है कि बहुजन गुलामी करें और सवर्ण उन पर राज करता रहे। ऐसे में संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अांबेडकर की घोर अवमानना करते हुए संविधान जलाने की घिनौनी हरकतें की जा रही है। जो संविधान समता प्रस्थापित करने का पैरोकार है, उसे नष्ट कर जातिवादी गुलामी की व्यवस्था कायम कर सवर्णों (तथाकथित) को सत्ताधारी बनने की चाह है।
    
■और अंत में.....
*संविधान व लोकतंत्र हमें समानता प्रदान करता है। मनुवाद से ग्रसित लोग विषमता की पुर्नस्थापना कर वर्ण व्यवस्था के माध्यम से बहुजनों को गुलाम व सवर्णों (तथाकथित) को सत्ताधारी मालिक बनाना चाहते है।*

     ................. *जय भीम*..............

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